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कश्मीर केरॊ लॊर
Friday, 13 March 2009 01:38
Kislay Komal
नद्दी उफनी-उफनी कॆ शहर मॆं बहै छै लहू अबॆ नस मॆं नै सङक पर बहै छै. डार सुखलॊ प्यार के पत्ता झरी गेलै बीयाबानॊ मॆं ऐन्हे जालिम हवा बहै छै. धूरा-बवंडर मॆं लेबझैलॊ शहरॊ के पॊर कोरे-कोर धोधैलॊ रेत बेसुमार बहै छै. कन-कन ठार जिगर धुंध कोहासॊ सगर जेहादी धार मॆं स्वर्ग व आजादी बहै छै. छिरयैलै आतंकी आगिन झरखलै संसार लॊर कश्मीर के संघरलै तॆ दुनिया दहै छै. ( कवि:कुंदन अमिताभ )
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